Thursday, July 15, 2021

ॐ #NEETay आरक्षणम स्वाहा : ओबीसी बुद्धजीवियों को देशव्यापी संखनाद करना चाहिए

 


 

दुनिया के अलग अलग हिस्से में जितने भी तरह के भेदभाव वाली समाजिक व्यवस्थाएं रही हैं, उनमे भारत  की जातिवादी समाजिक व्यवस्था सबसे लंबे  समय तक टिके रहने वाली सोशल हायरार्की  है.

दक्षिण एशिया को छोड़कर पूरी दुनिया मे जहां भी नस्लीय भेदभाव का विरोध और आंदोलन हुए है , वहां उस व्यवस्था से प्रिविलेज्ड तबके से जुड़े मानवीय लोग भी विरोध में शामिल हुए हैं. जैसे ब्लैक अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड का व्हाइट पुलिसकर्मी द्वारा किए गए मर्डर के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में ब्लैक और व्हाइट दोनो बराबर संख्या में नजर आ रहे थे.

रंगभेद के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ पूरी जिंदगी लड़ने वाले नेल्सन मंडेला की अंतिम यात्रा में रो रहे ब्लैक लोगों को उनके व्हाइट साथी गले लगा रहे थे. साथ रो रहे थे.

आज के समय अमेरिकी में एक भी अफ्रीकी मूल के व्यक्ति से फोर्स्ड स्लेवरी नही कराई जा रही है

काले गुलामों की खरीद फरोख्त रुके हुए जमाने हो गए. इनके संघर्षों में कम हीं सही लेकिन व्हाइट नागरिक भी मानवता के साथ खड़े हुए.

अब ये बताइए कि पोस्ट पढ़ रहे दलित आदिवासी पिछड़े समुदाय के व्यक्ति ने यह देखा है कि बताएं कि दलित पिछड़ों की जमानत की लड़ाई में उसके किसी सवर्ण साथी ने  मानवता के नाते सहभागिता निभाई है? 


जब गैर सवर्ण लोग 13 पॉइंट रोस्टर के लिए लड़ रहे थे, जब दलित 2 अप्रैल के आंदोलन में एससी एसटी एक्ट के खत्म करने का विरोध कर रहे थे, जब सरकार ने NEET और CLAT में ओबीसी कोटे को खत्म कर दिया है. 

ऐसे मुश्किल घड़ी में कोई शोशली प्रिविलेज्ड जातियों के मानवीय दोस्त या साथी लोग दलितों पिछड़ों के साथ खड़े हुए हैं? ऐसा न के बराबर दिखता है.

क्या भारत की जातिवादी सामाजिक व्यवस्था, यहां के शोशल प्रिविलेज्ड तबके के भीतर की इंसानियत इतनी खत्म कर चुकी है कि ये बराबरी के समाज बनने से डरते हैं? क्या ये अपना प्रिविलेज्ड को सदियों सदियों तक बरकरार रखने के लिए मानवता भूल चुके है?




Vishal Gangwarकेंद्रीय स्वास्थय सचिव सीके मिश्रा ने हाल ही एक इंटरव्यू में कहा है कि इस वर्ष आरक्षित वर्ग के 49.5 फ़ीसदी और अनारक्षित वर्ग के 50.5 फ़ीसदी अभ्यर्थियों की काउंसलिंग अलग-अलग होगी।

 Vishal Gangwar: पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के सिद्धांत को पीछे छोड़कर, ओपन कैटेगरी में अखिल भारतीय कोटा के तहत आधे से अधिक मेडिकल सीटों को अब ऊंची जातियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया जाएगा। दरअसल, केंद्रीय स्वास्थय सचिव सीके मिश्रा के एक बयान के बाद ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं। मिश्रा ने हाल ही एक इंटरव्यू में कहा है कि इस वर्ष आरक्षित वर्ग के 49.5 फ़ीसदी और अनारक्षित वर्ग के 50.5 फ़ीसदी अभ्यर्थियों की काउंसलिंग अलग-अलग होगी।  

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सी के मिश्रा के अनुसार इस वर्ष से आरक्षित (49.5 प्रतिशत) और अनारक्षित (50.5 प्रतिशत) श्रेणी के छात्रों के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया अलग-अलग हो जाएगी।https://twitter.com/BhimArmyChief/status/1415620424151408643/photo/1      https://twitter.com/MandalArmy_/status/1415597173241122817 


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